
लेकर आस कुछ दानों की,
गौरैया मुंडेर पर आती है ।
सूना- सूना सा भोर होता,
अब न चिड़ियाँ चहचहाती है।।
रख लो छत पर जल की कटोरी,
पंछियों को भी अन्न दान करो ।
करो बंद मोबाईल एकाक घड़ी,
रेडिएशन से न पंछी तमाम करो।।
गौरैया न कोई पंछी बचा नभ में,
नेट रेडिएशन से सब मर जाते है।
न मुंडेर पर अब जल की कटोरी,
हर पंछी भी प्रवासी बन जाते है।।
जब बसंत का भी आनंद उठाते,
चिडियों का कलरव न सुनाते है।
कैसा बसंत का मनभावन मौसम,
चीं-चीं चिड़ियों की न भोर जगाते है।।
आओ मिल सब कुछ इंतजाम करें,
मिले पल दो पल सुबह शाम करें।
कुछ रखे छत अन्न जल की कटोरी,
पंछी बचाव में कुछ अभियान करें।।
डॉ. बसंत श्रीवास “वसंत” (नरगोड़ा)
रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर
छत्तीसगढ़



