
सिंहवाहिनी, तेज़स्वी, तेज़
तुम्हारा सूर्य समान
मन की शुद्धि करती, देती तुम ज्ञान ।
कमल पर आसीन तुम मैया
हाथों में कमल शोभयमान ,
गोद में स्कन्द को थामें
भरती हो सबका मान।
सृष्टि की हो अधिष्ठात्री
इच्छाओ की पूर्ति करती
साधकों को मोक्ष दिलाती
शक्ति अपार धरनी।
हे देवी स्कन्दमात
तुम्हारी कृपा अपार
जीवन का पल उज्जल हो
मिले हर कार्य में सार।
नारद मुनि भी गाते है
और शिव भी गुणगान करे
देवता गण भी वंदन करते
तेरी ही जयकार करे।
नमन तुम्हे स्कन्दमाता
जग की तुम जननी
पुत्र स्कन्दमात धारणकृता
शक्ति का तुम हो रूप माता।।
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश



