

तेईस मार्च की वो सुबह, इतिहास में अमर हो गई,
तीन दीवानों की कहानी, हर दिल के अंदर हो गई।
फांसी के तख्ते पर भी जो मुस्कान सजाए खड़े रहे,
मौत के सामने भी अपने हौसले बढ़ाए खड़े रहे।
भगत सिंह का नाम गूंजता है, हर गली हर चौबारों में,
सुखदेव की याद बसती है, भारत के दिलदारों में।
राजगुरु की वीरता की गाथा, हर पीढ़ी को भाती है,
उनकी कुर्बानी से ही ये धरती मुस्कुराती है।
ना डर, ना भय, ना कोई शिकवा था,
बस देशप्रेम ही उनका जज्बा था।
आज भी उनका संदेश हमें राह दिखाता है,
हर युवा के दिल में एक जुनून जगाता है।
चलो आज हम भी कुछ ऐसा कर जाएं,
उनके सपनों का भारत फिर से बनाएं।
अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)




