साहित्य

माँ महागौरी

डॉ. सुमन मेहरोत्रा

माता महागौरी वंदना

अम्बे मैया, तेरे द्वार श्रद्धा से हम आए,
अर्ज हमारी सुन लो, अब दर्शन दो मैया।
संशय-विपद विदारिणी, दयामयी तुम मैया,
अम्बा, चहुँ ओर गूँजे तेरी जय-जयकार है।

शंखनाद से गूँज रहा गगन विशाल सारा,
“महागौरी- महागौरी” का निनाद अपार है।
तेरा सुंदर, सौम्य, मोहक दिव्य स्वरूप है,
मस्तक पर चंद्रमुकुट अति शोभित साकार है।

चार भुजाएँ शोभित, वर-अभय की धारा,
एक कर में डमरू, दूजे में त्रिशूल धरा।
श्वेतवर्णा देवी, सिंहपीठ पर विराजे,
महागौरी, तुम ही अन्नपूर्णा अवतार हो।

जग की सकल वाणी में तेरा ही विस्तार है,
महागौरी, तेरा रूप अनुपम अपार है।
शंखनाद में, माँ, तेरे दर्शन से अभिभूत हूँ,
द्वार तेरे दीप जले, चरणों में शीश निहार है।

सरस्वती माँ, कंठ में विराजो, हम तुम्हें मनाएँ,
रक्षा करो महागौरी, तेरी महिमा का गान करें।
तेरी शक्ति और गुण अनंत, अपरंपार हैं,
तेरी कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि अपार है।

जयकारों का मूल्य नहीं, यह भक्तों का प्यार है,
बोलो—जय-जय-जय-जय माता की, जयकार है।

स्वरचित
डॉ. सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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