
आज महागौरी दिवस, रखकर अष्टम रूप।
आई माँ संसार हैं,लगता रूप अनूप।
होकर वृषभ सवार मांँ, लेकर हाथ त्रिशूल,
मांँ का पूजन जो करे,उसे बनाती भूप।।
भक्त वत्सला मातु हैं, कीरति ललित ललाम।
उर में भरकर चेतना,जपें भक्त गण नाम।
कर मुद्रा आशीष की,मांँ का दिव्य स्वरूप,
पूर्ण करो मम कामना, दर्श मिले अविराम।।
शंखनाद है गूंँजता,महिमा बड़ी अपार।
माता रानी का सजा, फूलों से दरबार।
गौरी मांँ करती कृपा, अष्टम दिवस विशेष,
श्वेतांबर तन सोहता, करो सभी सत्कार।।
मांँ के जैसा रूप तो, जग में नहीं अनन्य।
इनके जैसा त्याग तप, किया न कोई अन्य।
शिव जी से वर प्राप्त कर, शक्ति पुंज अवतार,
व्रत करके नवरात्रि का, गीता होती धन्य।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
रायबरेली उत्तर प्रदेश




