
सफर चुनौती से भरा, रख मन में विश्वास|
बना अलग पहचान वो, सपने भर कर आस||
सुंदर नारी सौम्य- सी, घूँघट डाले लाज |
शिक्षा भी सह शोभता, करते अपने नाज||
तालमेल बैठा रही,घर करियर को साथ |
परंपरा भी सब निभा, थाम कलम को हाथ||
आत्मनिर्भर बन आज ये, स्वयं फैसला ठान|
सब रिश्तों को साथ रख,ऐसी प्रतिभावान ||
सब रिवाज में बन ठनी, सभी निभाती रीत|
हर संभव शिक्षित करें, सबके दिल को जीत ||
चार दिवारी मत रखो, दो इनको अधिकार |
बेटी पत्नी रूप में, बने ढाल परिवार ||
कंधे से कंधा मिला, चल पुरुषों के संग |
ह्रदय प्रेम की भावना, स्नेह कोमलता रंग||
क्या जीवन इनके बिना, हो जीवन आसान |
योगदान हर क्षेत्र में, दो इनको तुम मान ||
कर सुधार नारी दशा, यही सृष्टि आरंभ |
धन्य आधुनिक नारियाँ, पुरुष त्याग लो दम्भ||
धार वेशभूषा यहाँ,नई भूमिका आज |
पढ़ी-लिखी ये नारियाँ, रिश्ते माथे साज||
निभा सभी दायित्व को, रखती मन में धैर्य |
बनी पुरुष की प्रेरणा, प्रेम मूर्ति सौंदर्य ||
सभी जन्म नारी बनूँ, मन में बस ये चाह |
कोमल हूँ ममता भरी, ढूँढू अपनी राह||
शिक्षित हर नारी करो, अवसर सभी प्रदान|
पूजा इनके शक्ति को, कर इनका उत्थान||
रचती नव इतिहास ये, एक नया आयाम |
दुर्गा लक्ष्मी मात ये,सत-सत करो प्रणाम ||
पायल अग्रवाल ‘छनक ‘
साहित्यकार
मुजफ्फरपुर
बिहार




