

जय जगदम्बे,दुर्गे भवानी,
जग की पालनहार,
करतीं सबका बेड़ा पार
करतीं सबका बेड़ा पार।
1- जो भी माँ के द्वारे आता,
बिन माँगे सब कुछ पा जाता,
मन प्यासा न रह पाता,
बस रहती दरस की आस
माँ करतीं बेड़ा पार,माँ करतीं बेड़ा पार।
2- भक्ति-भाव से जो पूजन करते,
निशि दिन माँ का भजन जो करते,
निष्काम भाव से ध्यान हैं धरते,
होता है उनका उद्धार,
माँ करतीं बेड़ा पार, माँ करतीं बेड़ा पार।
3- पाप-पुण्य से ऊपर उठकर,
नहीं किसी का दिल दु:खा कर,
कर्म-पथ पर नित्य ही चल कर,
जीवन-धार बहाते हैं।
माँ करतीं बेड़ा पार,माँ करतीं बेड़ा पार।
4-तेरे रूप अनेक हैं माता,
नाम धरे कितने ही सब,
पर तू तो है सबकी दाता,
श्वाँस, शक्ति औ विवेक प्रदाता।
माँ करतीं बेड़ा पार, माँ करतीं बेड़ा पार।
जय जगदम्बे,दुर्गे भवानी,
जग की पालनहार,
करतीं सबका बेड़ा पार
करतीं सबका बेड़ा पार।।
रचयिता –
सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन, सद्यः निःसृत,©®, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।




