
शरारत तुमसे हो न हो,
सदाक़त तुमसे हो न हो।
मिरे होठों पर नाम तिरा,
मोहब्बत तुमसे हो न हो।
कई उम्मीद लगे तुमसे,
शफ़ाअत तुमसे हो न हो।
तुम्हें ढूंढा सहराओं में,
शिराक़ात तुमसे हो न हो।
उम्र भर चाहेंगे “रहमत”,
शिकायत तुमसे हो न हो।
शेख रहमत अली “बस्तवी”
बस्ती (उ.प्र.)
7317035246




