साहित्य

जीयो और जीने दो मेरे यार

उदय किशोर साह

खुद भी हँसों और गैरों को भी  तुम हँसाओ
खुशियों की सौगात  जन जन तक पहुँचाओ
करा दो धरा पे खुशियों की     आज बरसात
इसमें नहीं होता है किसी पूँजि की कोई बात

मुफ्त का होता है खुशियों का अमूल्य व्यापार
टैक्स भी नहीं लेती है देश की कोई   सरकार
सेहत के लिये है रामवाण     औषधि मेरे यार
खोल दो जगत में खुशी की मुफ्त की बाजार

खुशियां लाती है जीवन में नई नई  सी  बहार
फिजां में घुल जाती है जीने की  मौसम बयार
जन जन को है आज इस औषधि की दरकार
गम से निजात देकर देती है ख़ुशियों की संसार

खुशियां बाँट कर खुद भी यहाँ खुशी   मनाओ
हर एक को  जीवन में खुशहाली      दिलआओ
दिल की तार में स्वताः उठ  जायेगी     झनकार
बदल दो समाज में       वैमनस्यता की सहचार

बदलना होगा खुद की नीच सोंच व      व्यवहार
पड़ोसी को भी देना होगा खुशियों की     उपहार
कण कण में बहेगी जब खुशी की ये।      बयार
झूम उठेगा खुशी से हर गाँव व अपना    जवार

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार

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