डॉ रामशंकर चंचल की कृति वो गली,वो मकान,छाई विश्व पटल

मध्य प्रदेश आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ में जन्म हुआ डॉ रामशंकर चंचल की अद्भुत रुह प्रेम कथाएं कृति,वो गली, वो मकान इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई द्वारा प्रकाशित कृतियों में 17 बी कृति अमेज़न पर दस्तक देती कृति है जो सदियों जिंदा रहेगी और आनेवाले युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हुए रुह प्रेम की परिभाषा से परिचय कराती हुई रूह के पावन पवित्र सोच चिंतन पर दस्तक देती आत्मा विश्वास को पैदा कर ऊर्जा और ताकत प्रदान करती है

उक्त अद्भुत कृति के प्रथम पेज़ होगा दस्तक देता हुआ सार्थक चित्र को और कृति नाम,वो गली, वो मकान
की अद्भुत सराहना पर दस्तक देती सैकड़ों हस्तियों द्वारा सराहा गई सैकड़ो बधाई और प्रतिक्रिया पर डॉ रामशंकर चंचल ने कहां कि मेरा शौभाग्य है कि यही मेरी 17 बी कृति अमेज़न कृति है जो आज हजारों हजारों द्वारा सराही गई है यह सब कुछ ईश्वर कृपा और रूह आशीष है जी मुझे जीवंत रखें ऊर्जा और ताकत समेटे हुए सर्जन को जन्म देती हैं आज सब कुछ ईश्वर आशीष से नसीब प्यार और स्नेह है यह कि मेरा शौभाग्य है कि झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल की पावन भूमि में जन्म हुआ जो मुझे जिंदगी की परिभाषा समझा गई की सतत् कर्म पथ पर दस्तक दे सब कुछ ईश्वर को अर्पित कर दे यदि निष्ठा से पूर्ण समर्पण आत्मा विश्वास से सचित्र लिए कर्म शिक्षा है तो ईश्वर कृपा आशीष से सब कुछ मिलता है
यह मेरे जीवन की अद्भुत सत्य अनुभव है
स्मरण रहे डॉ रामशंकर चंचल ने देश को सैकड़ों कृतियां भेंट की हैं और आज सम्पूर्ण विश्व पटल पर दस्तक देती 17 बी कृति अमेज़न कृति भेंट करते हुए सुख सुकून महसूस करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कर मानव जीवन को सार्थक कर सुकून महसूस कर रहे हैं
वंदनीय है आदरणीय डॉ रामशंकर चंचल जो सालों से सोशल मीडिया पर देश में विश्व में साहित्य जगत में अमर हो मानवीयता संवेदनशील का शंखनाद करते हुए मानव मात्र के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं जिनका बेहद आदर और सम्मान से उनके लाखों चाहने वालों द्वारा प्यार और आशीष मिलता हैं
धन्य है झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल धन्य भारत देश जहां हिंदी भाषा को जीवन्त रखें अद्भुत सर्जन के साथ सालो से साधना और तपस्या करते हुए डॉ रामशंकर चंचल जैसे महान साहित्य साधक हैं जो अपनी सहजता सरलता और सादगी से भी हजारों की लिए प्रेरणा स्रोत है




