
उम्मीद के पंख लगाकर
छोटी चिरैया ने जब
आसमाँ की ओर देखा
इंद्रधनुषी स्वप्नों को
सुंदर आकार लिए
क्षितिज के आर-पार देखा
पंखों में हौसला भर
भूल हृदय का स्पंदन
पार की लक्ष्मण रेखा
देख उसकी हिमाकत
बाज लपका-झपटा
दूर उसे जा फेंका
घायल हो मासूम चिरैया
साथ टूटे स्वप्न लिए
जा धँसी समंदर में
कैद है जहाँ आज तक
उम्मीद के पंख धारे
उर्मि के निर्दयी पिंजर में।।
🍁वीणा अब्राहम सिंह🍁




