
क्या बताएंँ कि क्या वाक्या है
दिल में एक दर्द सा उठता रहा है!!
कोई उनसे यह जाकर पूछे
मेरे बारे में उनका क्या मशवरा है!!
हम तो थक चुके हैं मोहब्बत करते हुए
आप ही कह दे मर्ज़ की दवा क्या है!!
दिखाई नहीं देते वह मेरे घर में
वर्ना आने और जाने का सिलसिला है!!
खंज़र उठा के आज वह बोले हमसे
दिल तुम्हारा बहुत अफ़सोस-ज़दा है!!
किससे कहें हम दिल की बात को
खोने को पूरी ज़िन्दगी का वास्ता है!!
ना जाने किसकी नज़र लग गई
ऐसी मोहब्बत में रहना अब गुनाह है!!
घर में रहते ही नहीं वह मेरे
निगाहें किससे उनकी दो चार है!!
लतीफ़े सी चल रही है सियासत
जो बोल सकते हैं वह बे-ज़बाँ है!!
आप कह दे तो सब कुछ छोड़ दे
ज़िन्दगी के साथ तो बस दुआ है!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




