साहित्य

शिवांश

दुर्गेश मोहन

 

हम सब के हैं ,
प्यारे शिवांश।
इनके पिता के,
नाम हैं विकास।
उन्हें अपने बेटे पर,
टिकी है आस।
हमदोनो हमेशा रहेंगे,
पास_पास।
इनकी मां है,
न्यारी रागिनी।
ये विकास की है,
अद्भुत अर्द्धांगिनी।
इनकी अनुपम श्रेष्ठ ,
है कला।
ये अवश्य ,
मिटाती हैं बला।
ये अपने बच्चे पर,
रखती है ख़्याल।
इसलिए बड़े होकर,
ये बच्चे करेंगे कमाल।
बच्चे पढ़कर,
बढ़ाएंगे मान।
अपना भारत,
अवश्य बनेगा महान।
दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना (बिहार)

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