साहित्य

पूर्वांचल में गंगा सेवा को नई दिशा: वरिष्ठ साहित्यकार मुक्तिनाथ त्रिपाठी बने संयोजक

गोरखपुर। माँ गंगा की निर्मल धारा एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु समर्पित अखिल भारतीय संगठन दिव्य गंगा सेवा मिशन ने गोरखपुर निवासी वरिष्ठ साहित्यकार मुक्तिनाथ त्रिपाठी को पूर्वांचल का संयोजक मनोनीत कर एक सार्थक एवं प्रेरणादायी निर्णय लिया है।
यह मनोनयन केवल एक दायित्व प्रदान करना नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा के प्रति उनकी दीर्घकालिक निष्ठा का सम्मान है। श्री त्रिपाठी की साहित्यिक साधना सदैव भारतीय परंपराओं, मानवीय मूल्यों और सामाजिक चेतना से अनुप्राणित रही है। उनके विचारों और रचनाओं में जहाँ संस्कृति के संरक्षण का भाव है, वहीं समाज को जागृत करने का संकल्प भी स्पष्ट दिखाई देता है।
दिव्य गंगा सेवा मिशन, जो माँ गंगा की स्वच्छता, संरक्षण एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए निरंतर सक्रिय है, ने श्री त्रिपाठी जैसे अनुभवी एवं कर्मनिष्ठ साहित्यकार को यह दायित्व सौंपकर अपने अभियान को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उनके नेतृत्व में पूर्वांचल क्षेत्र में मिशन की गतिविधियों को नई ऊर्जा, व्यापकता और प्रभावशीलता मिलने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है।
इस अवसर पर साहित्यिक एवं सामाजिक जगत में हर्ष का वातावरण है। गोरखपुर सहित पूरे पूर्वांचल के साहित्यकारों, समाजसेवियों एवं शुभचिंतकों ने श्री मुक्तिनाथ त्रिपाठी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।
निस्संदेह, यह मनोनयन न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रमाण है, बल्कि यह इस सत्य को भी रेखांकित करता है कि जब साहित्य सेवा से जुड़ता है, तो वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन की सशक्त धारा बन जाता है।
श्री मुक्तिनाथ त्रिपाठी के रूप में मिशन को एक ऐसा संयोजक प्राप्त हुआ है, जिसकी विचारधारा भी जागरूक है और कर्म भी समर्पित—और यही समन्वय भविष्य में एक नई सांस्कृतिक चेतना का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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