
१
ईश – सा एक
दिव्य हरसिंगार
नाम अनेक।
२
कई नाम हैं
प्राजक्ता , शेफाली भी
हारसिंगार के ।
३
निकला वृक्ष
समुद्र मंथन से
पारिजात ।
४
खिलाते धरा
झरते रातभर
हरसिंगार।
५
खुद सो के
जगा गए नसीब
लाए सवेरा।
६
सदाबहार
कली – फूलों से लदा
हरसिंगार।
७
गिरा पत्तों पे
लगे फुलकारी – सा
हरसिंगार।
८
काल से हार
धरा को सौंपे तन
हरसिंगार।
९
लुप्त हो रहें
बाँके हरसिंगार
सिकुड़ी भू में।
१०
ताउम्र मैत्री
निभा हरसिंगार
मिट्टी में मिला।
११
जलाए मन
शोख हरसिंगार
विरहिन को ।
१२
रिझा है मन
शेफाली की अदा पे
चर्चाएँ गर्म।
१३
पारिजात की
श्वेत पंखुरियाँ दें
शांति संदेश।
१४
शांति – प्रेम का
बोया हरसिंगार
जग महका।
१५
लू – वर्षा सहे
समरस ज्ञान दे
हरसिंगार।
१६
मौसम हँसे
शेफाली इठलाए
मन डोली में ।
१७
मौन शेफाली
आकुल परिवेश
उजडा नीड़।
१८
हवा लुटाए
बू हरसिंगार की
जग द्वार पे।
१९
जग यज्ञ में
समिधा – सा जला
हरसिंगार।
डॉ मंजु गुप्ता , वाशी , नवी मुंबई




