
श्याम की बॉंसुरी बोल सुन डोलना*।
*जोहते बाट राधा रहे झूलना*।।
*देख श्यामा रही अब कहाँ घोलना*।
*कृष्ण राधे बुलाते सभी बोलना*।
*जब रचाते महारास को संग में*।
*रात भर योग में भक्ति के ढंग में*।।
*साथ गोपाल है राधिका रंग में*।
*आ गए छोड़ सब खेलते चंग में*।
*जिन्दगी श्याम सौंपी तुम्हें आइए*।
*मन चुरा कर अभी श्याम मत जाइए*।।
*हम तुम्हारे रहे प्रीत तो कीजिए*।
*अब हमें आप दिल में बसा लीजिए*।।
*डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण*
*छतरपुर मध्यप्रदेश*


