साहित्य

हारसिंगार पर हाइकू

डॉ मंजु गुप्ता


ईश – सा एक
दिव्य हरसिंगार
नाम अनेक।


कई नाम हैं
प्राजक्ता , शेफाली भी
हारसिंगार के ।

निकला वृक्ष
समुद्र मंथन से
पारिजात ।

खिलाते धरा
झरते रातभर
हरसिंगार।

खुद सो के
जगा गए नसीब
लाए सवेरा।

सदाबहार
कली – फूलों से लदा
हरसिंगार।

गिरा पत्तों पे
लगे फुलकारी – सा
हरसिंगार।

काल से हार
धरा को सौंपे तन
हरसिंगार।

लुप्त हो रहें
बाँके हरसिंगार
सिकुड़ी भू में।
१०
ताउम्र मैत्री
निभा हरसिंगार
मिट्टी में मिला।
११
जलाए मन
शोख हरसिंगार
विरहिन को ।
१२
रिझा है मन
शेफाली की अदा पे
चर्चाएँ गर्म।

१३
पारिजात की
श्वेत पंखुरियाँ दें
शांति संदेश।
१४
शांति – प्रेम का
बोया हरसिंगार
जग महका।
१५
लू – वर्षा सहे
समरस ज्ञान दे
हरसिंगार।
१६
मौसम हँसे
शेफाली इठलाए
मन डोली में ।
१७
मौन शेफाली
आकुल परिवेश
उजडा नीड़।
१८
हवा लुटाए
बू हरसिंगार की
जग द्वार पे।

१९
जग यज्ञ में
समिधा – सा जला
हरसिंगार।

डॉ मंजु गुप्ता , वाशी , नवी मुंबई

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