
आज मैं उस गली को भूल गया
गो कि मैं जिन्दगी को भूल गया।
आइना देखता रहा मुझ को
देखता था उसी को भूल गया ।
ख़ाब में तुम मिले थे मुझ से
मैं ख़ुदा की बंदगी को भूल गया।
खो गयी है इंसानियत अब तो
आदमी आदमी को भूल गया।
भूल कर भी न भूल पाएँगे
देख कर तुम्हें सभी को भूल गया।
मंजुला शरण “मनु”
राँची, झारखण्ड़।




