साहित्य

गज़ल

मंजुला शरण "मनु"

आज मैं उस गली को भूल गया
गो कि मैं जिन्दगी को भूल गया।

आइना देखता रहा मुझ को
देखता था उसी को भूल गया ।

ख़ाब में तुम मिले थे मुझ से
मैं ख़ुदा की बंदगी को भूल गया।

खो गयी है इंसानियत अब तो
आदमी आदमी को भूल गया।

भूल कर भी न भूल पाएँगे
देख कर तुम्हें सभी को भूल गया।

मंजुला शरण “मनु”
राँची, झारखण्ड़।

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