आज है विश्व लिवर दिवस विशेष स्वस्थ लिवर, स्वस्थ जीवन : शरीर का मौन रक्षक
डॉ रुप कुमार बनर्जी

प्रत्येक वर्ष 19 अप्रैल को “विश्व लिवर दिवस” मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को लिवर के महत्व, उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों, समय पर जांच तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। आज भारत सहित पूरे विश्व में लिवर रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, पीलिया, सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी समस्याएँ चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
लिवर हमारे शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो बिना रुके दिन-रात कार्य करता रहता है। इसे शरीर की “रासायनिक प्रयोगशाला” कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर में 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्यों को संचालित करता है। ऐ शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग है। इसके मुख्य कार्य हैं- भोजन को पचाने हेतु पित्त रस (Bile) का निर्माण,शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालना,दवाओं को मेटाबोलाइज करना,प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट का संतुलन, रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करना ,विटामिन, आयरन एवं ऊर्जा का संग्रह,रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना, यदि लिवर कमजोर हो जाए, तो इसका प्रभाव केवल पेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हृदय, मस्तिष्क, किडनी और पूरे शरीर पर पड़ता है।
लिवर से जुड़ी प्रमुख बीमारियाँ-
1. फैटी लिवर–
आजकल सबसे आम समस्या। इसमें लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है। इसका मुख्य कारण मोटापा,मधुमेह
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल,अधिक तला-भुना एवं मसालेदार भोजन और व्यायाम की कमी है।
2. हेपेटाइटिस (A, B, C, E)–
यह वायरस जनित लिवर की सूजन है। हेपेटाइटिस A / E – दूषित पानी और भोजन से , हेपेटाइटिस B / C – संक्रमित रक्त, सुई, शारीरिक द्रव से आदि
3. पीलिया :- आंखों और त्वचा का पीला पड़ना लिवर रोग का प्रमुख संकेत है।
4. लिवर सिरोसिस
लंबे समय तक लिवर को नुकसान होने पर यह कठोर और स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है।
5. लिवर कैंसर
पुराने सिरोसिस, फैटी लिवर या वायरल हेपेटाइटिस के रोगियों में इसका खतरा अधिक होता है।
ऐसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें :- भूख कम लगना ,जी मिचलाना,उल्टी, पेट के दाहिने भाग में दर्द, आंखों का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब, अत्यधिक थकान, तेजी से वजन घटना, पैरों या पेट में सूजन
होम्योपैथिक दृष्टिकोण :- होम्योपैथी में लिवर रोगों का उपचार रोगी की संपूर्ण शारीरिक एवं मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है। रोगी की प्रकृति, पाचन क्षमता, खान-पान और जीवनशैली के आधार पर उपचार दिया जाता है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपचार:- ताजा और संतुलित भोजन लें, तला-भुना भोजन कम करें, शराब और धूम्रपान से दूर रहें, नियमित व्यायाम करें, पर्याप्त पानी पिएँ, अपना वजन नियंत्रित रखें, समय-समय पर LFT जांच कराएँ
क्या है लिवर फीवर? :-
आजकल आम बोलचाल में “लिवर फीवर” शब्द काफी सुनने को मिलता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में यह कोई एक निश्चित बीमारी नहीं है। यह आमतौर पर Hepatitis, Liver Abscess या अन्य संक्रमणों के साथ होने वाले बुखार को दर्शाता है।
इसके मुख्य लक्षण हैं :- लगातार बुखार
अत्यधिक कमजोरी और थकान
भूख में कमी, मितली या उल्टी
पेट के दाहिने हिस्से में दर्द
आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (Jaundice)
कब हो जाएं सावधान? :- यदि बुखार 2–3 दिन से अधिक बना रहे, पेट में तेज दर्द हो या शरीर पीला पड़ने लगे, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। तुरंत चिकित्सकीय जांच जैसे LFT और अल्ट्रासाउंड कराना आवश्यक है।
क्या रखें ध्यान? :- हल्का और सुपाच्य भोजन लें जैसे मूंग की दाल की खिचड़ी, गीला चावल, आलू और कच्चा केला को उबाल के उसका चोखा,पतली दही, लौकी पपीता नेनुवा तोरी की हल्के मसाले वाली उबली हुई सब्जी इत्यादि इत्यादि। बहुत ज्यादा तैलीय व मसालेदार भोजन से बचें।स्वच्छ पानी पिएं और पूर्ण विश्राम करें। “लिवर फीवर” को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। सही समय पर पहचान, जांच और उपचार ही सुरक्षित स्वास्थ्य की कुंजी है। होम्योपैथी एक सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प है, बशर्ते इसे सुयोग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की देखरेख में लिया जाए।
लिवर चुपचाप काम करता है, पर जब बीमार होता है तो पूरे शरीर को प्रभावित करता है। इस विश्व लिवर दिवस पर संकल्प लें “स्वस्थ खानपान अपनाएँ, लिवर को रोगमुक्त बनाएँ।”
डॉ रुप कुमार बनर्जी
होमियोपैथिक चिकित्सक


