साहित्य

बहती जलधारा

रिंकी अग्रवाल 'प्राची'

कुछ कहती है यह बहती जलधारा,
जीवन में ऊर्जा का संचार करती है।
कल-कल करती बहती जलधारा,
जीवन का नाद सुनाती है।
जल है तो जीवन है,यही राग अलापती है।
भारत भूमि धन्य हैं, प्राकृतिक संपदा से भरपूर।
जीवनदायिनी नदियाँ यहां जल से भरपूर।
गंगा के पावन तट पर भक्ति रस की बयार बहती।
जीवन में ऊर्जा का संचार करती।
पेट की क्षुधा शांत करने के लिए,भूमि को उपजाऊ करती।
पाश्चात्य देश में जाकर देखो, बहुत हाल बुरा है।
दक्षिण अफ्रीका का देश केपटाउन जल विहीन घोषित हो चुका है।
हम भारत के बासी नदियों को भी माता कह कर बुलाते हैं।
नदियाँ भी माता का दायित्व निभाती हैं।
बंजर से बंजर भूमि को भी सींच ही जाती हैं।
आने वाली पीढ़ियों का कुछ तो ख्याल करो।
जल को संचित करो, मानव जन का व्यवहार करो।

रिंकी अग्रवाल ‘प्राची’
खुर्जा बुलंदशहर उत्तर पदेश

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