
तुम्हारे हाथ में लगी मेहंदी
बे-फ़िक्र रातों में सजी मेहंदी!!
मेहंदी का रंग मोहब्बत हो गया
प्यार में सजी-धजी मेहंदी!!
रंग हरे से लाल हो गया
तुम्हारे हाथों में जब लगी मेहंदी!!
वफ़ा और उल्फ़त का नाम आया
नाम साजन के जब लगी मेहंदी!!
नारी के प्यार की बात जब चली
करवा चौथ व्रत में, साक्षी बनी मेहंदी!!
दुल्हन का श्रृंगार यही है
हमारा प्यार और तुम्हारी मेहंदी!!
हम तो दिल अपना हार बैठे
तुम्हारे हाथ जब लगी मेहंदी!!
प्यार की इंतहा हो गई
एक सुहागन के जब लगी मेहंदी!!
रंग हाथों में ऐसा रचा
घर में भी रच बस गई मेहंदी!!
हथेली में चांँद उतर आया
बूटा-बूटा सँवर गई मेहंदी!!
रस्म शादी की हो या त्योहार की
सुर्ख़ शर्म से लाल हुई मेहंदी..!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




