
पृथ्वी
माता मेरी
पिता है असमान
बरखा भी प्यारी लगे
प्रकृति
खूब सजे
हरा भरा उपवन
धरती भी सुंदर लगे
नलकूप
चांद तारे
सूरज प्रकाश करे
मन भावन धूप लगे
पृथ्वी
है बोलती
वृक्ष मत काट
शुद्ध हवा तन लगे
पावन
भारत भूमि
कृषिप्रधान जान ले
भारतीयों के भाग्य जगे
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर




