साहित्य

धरती उजड़ रही है

डॉ जगदीश नारायण गुप्ता "जगदीश"

विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष

1
धरती उजड़ रही है, आकाश रो रहा है।
पर्यावरण प्रदूषित चहुँ ओर हो रहा है।।
आया समय अजूबा,मिलते नही सहारे।
देखो धरा हमारी, मानव तुझे पुकारे।।
2/
धरती हमें पुकारे, पौधे चलो लगाओ।
यह जिंदगी तुम्हारी, बातें नहीं बनाओ।।
देखो सुनो किसानों, धरती उजड़ रही है।
दूषित हवा व पानी सेहत बिगड़ रही है।।
3/
पौधे यहाँ लगाओ, धरती सभी बचाओ।
सारे जहांन सुंदर, भारत सभी बनाओ।।
दुनिया यहीं हमारी, गाती चले कहानी।
देखो सभी जवानों,जीवन बने रुहानी।।

डॉ जगदीश नारायण गुप्ता “जगदीश”
बनारस✍️✍️

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