साहित्य

पहलगाम की त्रासदी

आशा बिसारिया

बिंदिया छूटी,चूड़ियाँ टूटी,सूनी हुई कलाई
घाटी पहलगाम में…..
दर्द में बदल गयी शहनाई,कैसी आफत आई
मेरे पहलगाम में….
खुश हो रहे थे बच्चे,देख नज़ारा कश्मीर का
हाउसबोट देखी ,गाता शिकारा बेनजीर था
खुशियाँ थीं चेहरे पर छाईं,ठंडी हवाएं आईं
घाटी…..
आतंकी आए और ,सहमा दिया हर एक को
नाम,धर्म पूछके,मार दी गोली एक-एक को
अरमानों पे बिजली टूटी,दुख की बदली छाई
घाटी…..
भारतवासी सारे ,सह नहीं पाए इस पीर को
घायल हुई थी आत्मा,दर्द हुआथा कश्मीर को
जग वाले स्तब्ध रह गये,फूटी सबकी रुलाई
घाटी……
सिंदूर आपरेशन ,चला दिया फिर मोदी ने ,
इस तरह धूल चटाई,पाक को पीएम.मोदी ने
दुश्मन की सेना घबराई ,देशभक्ति रँग लाई
घाटी….
चीन और तुर्किए के , ड्रोन सभी बेकार थे
घुटनों पे पाकआया,राफेलके ऐसे चमत्कार थे
एयरफोर्स ने करी चढ़ाई,पाक ने मुंँह की खाई
मेरे……
आशा बिसारिया चंदौसी उ.प्र.

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