

नवादा/रांची। बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट (बिहार इकाई) के तत्वावधान में आज एक भव्य मासिक काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। रांची से जुड़ीं संयोजिका एवं संचालिका खुशबू बरनवाल ‘सीपी’ ने अपनी कुशल संचालन क्षमता से विभिन्न शहरों के रचनाकारों को एक मंच पर संगठित कर काव्य प्रेमियों के लिए भावनाओं का अनुपम ‘गुलदस्ता’ प्रस्तुत किया, जिसकी सुगंध जूही, बेला और चम्पा-चमेली की तरह पूरे वातावरण में व्याप्त हो गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ खुशबू जी द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात काव्य पाठ का सिलसिला आरंभ हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि अलका सोनी ने ‘मेरा नाम तिरंगा कर देना’ के माध्यम से देशभक्ति का जज्बा जगाया। संरक्षक कामेश्वर कुमार ‘कामेश’ ने ‘सारी नारी अच्छी’ और ‘नारी पर अत्याचार बंद करो’ जैसी रचनाओं से सामाजिक चेतना को स्वर दिया।
राष्ट्रीय सचिव सत्यभामा सिंह ने ‘पहलगाम पर बिलख रही हो जब ये बेटी’ रचना से भावनाओं को उद्वेलित किया, वहीं ज्योति वर्णवाल ने ‘पंज प्यारों की अमर गाथा (बैसाखी मेला)’ के माध्यम से ऐतिहासिक शौर्य और सांस्कृतिक गौरव का चित्रण किया। खुशबू बरनवाल ‘सीपी’ ने ‘अजन्मी बेटी की पुकार—मुझे जीने दो’ जैसी मार्मिक प्रस्तुति से श्रोताओं को भावुक कर दिया।
सोनी बरनवाल ने ‘शब्दों का महत्व’ कविता से साहित्य में शब्दों की शक्ति को रेखांकित किया, जबकि नरेंद्र कुमार ने ‘संशोधन होना चाहिए’ के जरिए समसामयिक विषयों पर प्रभावशाली कटाक्ष किया। इसके अतिरिक्त खुशबू जी की रचना “शाम और मैं” ने प्रकृति और स्त्री मन की गहराइयों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंत में संचालिका खुशबू बरनवाल ‘सीपी’ ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन नए रचनाकारों को मंच देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह काव्य गोष्ठी शब्दों, भावनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति के सुंदर संगम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जहाँ उपस्थित साहित्यकारों ने अपनी प्रतिभा की अमिट छाप छोड़ी।




