साहित्य

स्वच्छ रखो अपना शहर यारो

कुलदीप सिंह रुहेला

स्वच्छ रखो अपने शहर को मेरे यारो अपने
घर हर गली में खुशबू फैले साफ रहे ये डगर।
न गंदगी तुम फैलाओ नालों में कचरा न डालो
नदी हमारी माँ है, इसमें ज़हर न तुम उछालो।

प्लास्टिक की आदत छोड़ो धरती को राहत दो
हरियाली की चादर ओढ़ो जीवन को नई चाहत दो।
झाड़ू उठाओ हाथों में ये कोई छोटा काम नहीं
स्वच्छता से बढ़कर दुनिया में कोई भी अरमान नहीं।

जहाँ सफाई होती है वहाँ खुशियाँ मुस्काती हैं
रोग भागते दूर वहाँ सेहत गीत सुनाती है।
आओ मिलकर कसम ये खाएँ भारत को चमकाएँ हम
हर कोना हो साफ सुथर ऐसा देश बनाएँ हम।

कुलदीप कहे सुन लो सब ये संदेश है सच्चा
स्वच्छ रहेगा जब हर आँगन तब ही होगा कल अच्छा।
मेरे चांद तुम भी सुन लो ये प्यारी सी पुकार
स्वच्छता अपनाओ मिलकर यही है सबसे बड़ा त्योहार।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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