
हाँ मजदूर है जीवन में हम सभी ।
क्योकि मेहनत करते हैं हम सभी अपने अपने स्तर पर ।
पर मेहनत की योग्यता होती हमारे शिक्षा,कर्म पर ।
पर कुछ को करना पड़ता शारीरिक श्रम अधिक ।
चाहे मौसम कोई भी हो,करनी होती मजदूरी हर हाल में ।
परिवार पालन हेतु कभी घर से भी करना होता पलायन ।
दिन भर मेहनत मजदूरी कर गुजरनी होती रात ।
तंग कमरे में कई साथियों संग,
तो कभी सोना होता फुटपाथों पर ।
और कभी कुचलें जाते फुटपाथ पर ।
मेहनत संग चलती अपनी जिंदगी ।
जाड़ा गर्मी बरसात हर ऋतु अपने लिए एक समान ।
अपने अपने स्तर पर करते मेहनत हम सभी ।
कभी थोड़े में भी खुशियों के संग थिरकती अपनी जिन्दगी ।
कभी हालात का शिकार हो फटेहाल भी हो जाती जिदंगी ।
तब भी हम हिम्मत न हारते ।
अपने मेहनत से औरो का जीवन ,
सरल बना अपनी जीविका चलाते ।
हम धरती माँ के पुत्र धरती से जुड़े रहते ।
हाँ हम मजदूर अपनी मेहनत से
अपने किस्मत की कहानी खुद लिखते ॥
निवेदिता सिन्हा
गया जी, बिहार



