
धरती में खुशियां है छाई।
देखो बुद्ध पूर्णिमा आई।।
हैं अवतारे गौतम धरती।
मधुर हँसी है मुख पर सजती।।
देख प्रकृति भी हर्षाई।
मंद पवन है बहती भाई।।
मात नाम कहते थे नयना।
शुद्धोधन आँखों का गहना।।
बुद्ध लुंबिनी धरा पधारे।
शाक्य वंश नैनो के तारे।।
लालन-पालन मौसी करती।
नाम सिद्धार्थ बचपन कहती।।
दुखियों का दुख देख न पाए।
सत्य ज्ञान आचार्य बताए।। यशोधरा से ब्याह रचाया।
पुत्र रूप में राहुल पाया।।
व्याकुलता तो मन में जागी।
ज्ञान खोज में माया त्यागी।।
बोध गया पीपल के साए।
ज्ञान प्राप्त कर बुद्ध कहाए।।
पुनर्जन्म का चक्र बताया।
अष्टांगिक पथ है समझाया।। अज्ञानता को दूर भगाया।
चार आर्य का धर्म सिखाया।।
निलम अग्रवाल *दीक्षिता*




