
मैंने कुछ कविताएँ कल लिखने के लिए छोड़ दी हैं
जो मुझे आश्वासन देती हैं
कि मैं कल भी ज़िंदा रहूँगी
मैं अपनी मौत पर भी
कुछ अनलिखी कविताएँ छोड़ जाऊँगी।
जो मुझे अगले जीवनका आश्वासन देंगी।
मैं अपने पीछे
एक अजनबी दुनिया छोड़ जाऊँगी,
जो मुझे एक बेहतर
दुनिया का आश्वासन देगी।
-डो.दक्षा जोशी ‘निर्झरा’
अहमदाबाद,गुजरात।




