साहित्य

नमन वन्दन गुरुदेव को गुरु महिमा 

नरसिंगाराम

*गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई*

गुरु की महिमा गूढ़ है, कथन वर्णनातीत ।

गुरु की कृपा रहे जहाॅं, वह जग जावे जीत ।।

 

प्रथम गुरु मात जानिए, खान पान परिधान ।

अच्छा चलना बोलना, देती सबका ज्ञान ।।

 

गुरुवर जानो तात को, रखता तन-मन ख्याल ।

धर्म-कर्म समझावते, जीवन कर खुशहाल ।।

 

पहचान परमतत्व की, शब्द सुनायो सार ।

शिक्षा शुभ संस्कार दे, किया बड़ा उपकार ।।

 

शिष्य सुपात्र के लिए, गुरु लेते अवतार ।

सत्य राह का ज्ञान दे, जीवन करे सुधार ।।

 

गुरुजन की आशीष से, मिले सत्य की राह ।

बन्धन टूटे दोष का, पावे सुधा प्रवाह ।।

 

गुरुवर के आशीष की, महिमा परम अपार ।

माया बन्धन काट के, तुरन्त गुरु ले तार ।।

 

मात-पिता गुरुदेव जी, रखते सिर पर हाथ ।

देते शुभ आशीष वे, निशदिन रहते साथ ।।

 

गुरु की ही आशीष से, अवगुण जाते छूट ।

नश्वर इस संसार का, बन्धन जाता टूट ।।

 

सदा सुखी जीवन रहे, विपदा मिटे वियोग ।

गुरु को वन्दन नित्य ही, काटे सब ही रोग ।।

 

ज्ञान बिना भ्रम में रहा, घट अंधेरा घोर ।

ज्ञान दीप से हो गया, प्रकाश चहूॅं ओर ।।

 

असत्य मिथ्या जगत में, कैसा है निजरूप ।

दर्शाया गुरुदेव ने, सत चिदानंद रूप ।।

 

नरसिंगाराम जीनगर निजरूप

बाड़मेर, राजस्थान

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