
*गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई*
गुरु की महिमा गूढ़ है, कथन वर्णनातीत ।
गुरु की कृपा रहे जहाॅं, वह जग जावे जीत ।।
प्रथम गुरु मात जानिए, खान पान परिधान ।
अच्छा चलना बोलना, देती सबका ज्ञान ।।
गुरुवर जानो तात को, रखता तन-मन ख्याल ।
धर्म-कर्म समझावते, जीवन कर खुशहाल ।।
पहचान परमतत्व की, शब्द सुनायो सार ।
शिक्षा शुभ संस्कार दे, किया बड़ा उपकार ।।
शिष्य सुपात्र के लिए, गुरु लेते अवतार ।
सत्य राह का ज्ञान दे, जीवन करे सुधार ।।
गुरुजन की आशीष से, मिले सत्य की राह ।
बन्धन टूटे दोष का, पावे सुधा प्रवाह ।।
गुरुवर के आशीष की, महिमा परम अपार ।
माया बन्धन काट के, तुरन्त गुरु ले तार ।।
मात-पिता गुरुदेव जी, रखते सिर पर हाथ ।
देते शुभ आशीष वे, निशदिन रहते साथ ।।
गुरु की ही आशीष से, अवगुण जाते छूट ।
नश्वर इस संसार का, बन्धन जाता टूट ।।
सदा सुखी जीवन रहे, विपदा मिटे वियोग ।
गुरु को वन्दन नित्य ही, काटे सब ही रोग ।।
ज्ञान बिना भ्रम में रहा, घट अंधेरा घोर ।
ज्ञान दीप से हो गया, प्रकाश चहूॅं ओर ।।
असत्य मिथ्या जगत में, कैसा है निजरूप ।
दर्शाया गुरुदेव ने, सत चिदानंद रूप ।।
नरसिंगाराम जीनगर निजरूप
बाड़मेर, राजस्थान
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