साहित्य

गुरु पूर्णिमा धनुष पिरामिड

श्रीमती लक्ष्मी चौहान

जो

तम

हरते

जीवन में

आशा के दीप

जलाते रहते

बनकर किरणें

 

गुरू पूर्णिमा पर्व

नमन आपको

है गुरुवर

आपसे ही

रोशन

जग

हैं

 

है

ईश

समान

रूप तेरा

तेरे चरणों

में झुका हुआ है

हमेशा शीश मेरा

 

माता-पिता प्रथम

गुरु हैं जग में

भूल ना जाना

सुसंस्कार

हमको

देते

हैं

श्रीमती लक्ष्मी चौहान ‘रोशनी’

कोटद्वार, उत्तराखंड

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!