
ये शहर के लोग बड़े मतलबी होते हैं
चेहरों से मीठे मगर अंदर से खोटे होते हैं
दिल के करीब आकर जख्म दे जाते हैं
अपने ही अक्सर यहां गैर बन जाते हैं।
फिर भी ऐ दोस्त तू हिम्मत मत हारना
सच और ईमान का दीपक जलाना
दुनिया की चालों से खुद को बचाए रखना
अपनी अच्छाई को दिल में सजाए रखना।
झूठ की महफिल में सच तन्हा रहता है,
पर वही इंसान आखिर ऊंचा उठता है।
मुश्किल की राहों में जो मुस्कुराएगा,
वक्त उसी के कदमों में सिर झुकाएगा।
मतलब की दुनिया में नेक बनकर जीना,
गिरकर भी हर बार संभलकर जीना।
कल यही संघर्ष तेरी पहचान बनेगा,
तेरा अच्छा व्यवहार ही सम्मान बनेगा।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश



