साहित्य

अद्भुत है जीवन की धारा

हेमा जालान

अद्भुत है जीवन की धारा। तन मानुष का पाया न्यारा।

धन्यवाद करते दातारी । सदा रहेंगे हम आभारी ।।

 

हरि की महिमा अपरंपारा। रखें नियंत्रण जग पर सारा।

कण-कण में प्रभु आप विराजें। भक्तों के अंतस में साजें।।

 

दीन-दुखी के तुम रखवाले। कष्ट सभी जीवन के टाले।

अति पावन है नाम तुम्हारा। देते हो प्रभु तुम्ही सहारा।।

 

पल-पल छलती सबको माया। नश्वर होती है ये काया।

खाली हाथ सभी हैं जाते। नित्य संत सबको समझाते।।

 

मीठी-मीठी वाणी बोलो। मधुर शहद उसमें तुम घोलो।

काम करो तुम नित हितकारी। उन्नति जीवन में हो भारी।।

 

हाथ मदद का सदा बढ़ाना। पशु- पक्षी को नहीं सताना॥

सबसे रखना भाईचारा। बहे प्रीत की प्रेमिल धारा॥

 

नेक-कार्य तुम मन में धारो। गलती पर तुम स्वयं विचारो।

पुण्यों की तुम भर लो झोली, प्रेम-रंग से खेलो होली॥

 

नाम ईश का जप लो भाई। होता है हरदम सुखदाई।

मोक्ष राह खुलती है जानो। सच्चाई अंतस में ठानो।।

 

 

हेमा जालान’कनक’ मुंगेर🙏🏼

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