साहित्य

शुभ कामनाओं के अशआरों से सुमनों का हार पिरोया है –

डॉ मंजु गुप्ता 

 

 

भोर की लाली को लागी ऐसी लगन

जमाने को न्योता देने में हुई मगन

रेश्मी रवि रश्मियाँ रहगुजर बन कर के

सजाने में लगी आशिकी का अंजुमन

दुआ ,आशीषों से खिले -खिले मुखड़े

अटल सुहाग से भरते युगल का दामन

मोहब्बत के मंगलसूत्र का हर मनका

द्वैत में अद्वैत से दमकता बन कुंदन

सत्तावनवीं शादी की साल गिरह पर

महक रहा ‘ मंजु ‘ जश्न ए इश्क का मधुबन ।

डॉ मंजु गुप्ता

वाशी , नवी मुंबई ।

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