साहित्य

सरस्वती वंदना

दिनेश पाल सिंह 'दिव्य

माँ शारदे! वरदान दीजिए,

मन में नव अभियान दीजिए।

अज्ञानों का तम हर लीजे,

ज्ञान-ज्योति का दान दीजिए॥

 

वीणा की झंकार मधुर हो,

वाणी में सत्कार मधुर हो।

शब्द-शब्द में भाव बसें माँ,

जीवन का व्यवहार मधुर हो॥

 

श्वेत कमल-सी निर्मल बुद्धि,

सत्य-पथों की अटल समृद्धि।

विनय, विवेक,सद्भाव भरें माँ,

जीवन में हमारी कर दो शुद्धि।।

 

लेखनी को शक्ति प्रदान कर,

जनहित का संकल्प महान कर।

राष्ट्र-प्रेम से पूरित कर दे,

जीवन को अनुपम वरदान कर॥

 

माँ शारदे! वरदान दीजिए,

मन में नव अभियान दीजिए।

अज्ञानों का तम हर लीजे,

ज्ञान-ज्योति का दान दीजिए॥

 

जयति वीणापाणि वरदायिनी,

जय जय माँ सरस्वती।

 

कवि दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’

जनपद संभल उत्तर प्रदेश

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