
माँ शारदे! वरदान दीजिए,
मन में नव अभियान दीजिए।
अज्ञानों का तम हर लीजे,
ज्ञान-ज्योति का दान दीजिए॥
वीणा की झंकार मधुर हो,
वाणी में सत्कार मधुर हो।
शब्द-शब्द में भाव बसें माँ,
जीवन का व्यवहार मधुर हो॥
श्वेत कमल-सी निर्मल बुद्धि,
सत्य-पथों की अटल समृद्धि।
विनय, विवेक,सद्भाव भरें माँ,
जीवन में हमारी कर दो शुद्धि।।
लेखनी को शक्ति प्रदान कर,
जनहित का संकल्प महान कर।
राष्ट्र-प्रेम से पूरित कर दे,
जीवन को अनुपम वरदान कर॥
माँ शारदे! वरदान दीजिए,
मन में नव अभियान दीजिए।
अज्ञानों का तम हर लीजे,
ज्ञान-ज्योति का दान दीजिए॥
जयति वीणापाणि वरदायिनी,
जय जय माँ सरस्वती।
कवि दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश




