साहित्य

हिंदी पत्रकारिता दिवस 30 मई।।

श्री हंस

1

कभी बोल मीठे तो कभी चीत्कार लिखता है।

कभी विपक्ष तो कभी सरकार लिखता है।।

यह कलम का सिपाही रुकता नहीं कभी।

सही बात हो तो वह बार -बार लिखता है।।

2

कभी आर-पार तो कभी कारोबार लिखता है।

कभी विसंगति और कभी प्रचार लिखता है।।

समाज राष्ट्र के हर एक बिंदु को छूती कलम।

हर विषय को छूता वह सरोकार लिखता है।।

3

कभी ओज तो कभी रस श्रृंगार लिखता है।

कभी खिजा तो कभी खूब बहार लिखता है।।

खुशी गम के हर एक पहलू को छूता वह।

कभी जीत तो कभी कोई हार लिखता है।।

4

कभी व्यंग तो कभी बन के हास्यकार लिखता है।

कभी शांति तो कभी वह अंगार लिखता है।।

छू जाती है कलम उसकी दिल को कभी।

जब भावनाओं का पूरा ही संसार लिखता है।।

5

सब पढ़ते हैं कि बहुत जोरदार लिखता है।

कभी दब के या बन कर असरदार लिखता है।।

हर हालात को लिखता वह खूब समझ कर।

सब कोई और नहीं बस कवि पत्रकार लिखता है।।

रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”

बरेली।।

©. @. skkapoor

सर्वाधिकार सुरक्षित

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