
चाहे कोई नेता हो या व्यापारी।
हौसलों की ऊँची उड़ान लिए,
लिखती जाती नई सफलता की क्यारी।
सूरज से पहले जाग उठती है,
मेहनत से अपनी राह बनाती है।
आँधी, तूफाँ, मुश्किल लाख आएँ,
हर चुनौती को हँसकर अपनाती है।
कलम उठाए तो इतिहास बदल दे,
विज्ञान में नए आयाम गढ़ाती है।
सीमा पर डटकर देश संभाले,
अंतरिक्ष में भी परचम लहराती है।
नारी केवल शक्ति का नाम नहीं,
त्याग, तपस्या की जीवित गाथा है।
जिस घर-आँगन में उसका सम्मान हो,
वहीं सुख-समृद्धि की सच्ची परिभाषा है।
आज की नारी सब पर है भारी,
साहस जिसकी सबसे बड़ी सवारी।
अपने दम पर जग को दिखला दे,
वह भारत की गौरवमयी नारी।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




