
बेटी आई थी
इस बार पहली बार
वह कुछ दिन ठहरी
उसकी मां के जाने के बाद
पहली बार वह मेरे साथ,पास
रही, रही कुछ दिन
पर पता नहीं चला
जब वह गई तो ऐसा लगा
कल परसों आई है
आज जा रही हैं
उसके रहते हुए
न दिन पता चला
न रात
कितनी सुख सुकून से जीते
निकल गई
उसकी मां के जाने के बाद
पहली बार ऐसा हुआ
उसके आने से
वक्र पता नहीं चला
कितनी ताकत होती हैं न
बेटी, पिता की
जान होती हैं
प्राण होती है
यह पावन पवित्र रिश्ता
सिर्फ बेटी और पिता ही
जानते हैं
सृष्टि विकास की जननी
संवेदना और भावुकता की
जिंदा मिसाल बेटी
सत् सत् प्रणाम करता हूं
बेटी को सादर प्रणाम
ईश्वर दुनियाँ की तमाम
बेटियों को
अपार प्यार सुख सुकून दे
ताकि वह सदा ही सभी को
खुशियां बांट कर
सुखद अहसास करें
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश



