काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच की 200वीं गोष्ठी हर्षोल्लास के साथ संपन्न
साहित्यकारों ने केक काटकर मनाया उत्सव

वाराणसी । पंजीकृत संस्था काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच, वाराणसी की 200वीं शनिवारिय गोष्ठी शनिवार को उत्साह, उमंग और साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुई। इस विशेष अवसर पर संस्था के पदाधिकारियों एवं साहित्यकारों ने केक काटकर 200वीं गोष्ठी का उत्सव मनाया तथा साहित्य साधना की इस निरंतर यात्रा को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
गोष्ठी का शुभारंभ निर्धारित समय पर हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री देवेंद्र पाण्डेय ने की, जबकि श्री गौतम अरोड़ा ‘सरस’ मुख्य अतिथि एवं श्री बैजनाथ श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री मुनींद्र पाण्डेय ‘मुन्ना’ ने किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष एवं हास्य-व्यंग्य कवि भुलक्कड़ बनारसी ने अपने स्वागत गीत के माध्यम से सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों का अभिनंदन किया। इसके उपरांत सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ कराया। अपने संबोधन में भुलक्कड़ बनारसी ने कहा कि “200वीं गोष्ठी का यह पड़ाव संस्था के सभी साहित्यकारों के सामूहिक प्रयास, समर्पण और साहित्य प्रेम का परिणाम है।”
अध्यक्षीय उद्बोधन में देवेंद्र पाण्डेय ने कहा कि “निरंतर दो सौ गोष्ठियों का आयोजन संस्था की साहित्यिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। साहित्य समाज को संस्कारित करने का माध्यम है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को रचनात्मक दिशा प्रदान करते हैं।”
मुख्य अतिथि गौतम अरोड़ा ‘सरस’ ने कहा कि “काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच ने वाराणसी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्था की 200वीं गोष्ठी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो सभी साहित्यकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।”
गोष्ठी में उपस्थित कवियों एवं शायरों में भुलक्कड़ बनारसी, जयप्रकाश मिश्र धानापुर, सत्यनारायण जी, विजय आनंद, मुनींद्र पाण्डेय मुन्ना, देवेंद्र पाण्डेय, गौतम अरोड़ा सरस, बैजनाथ श्रीवास्तव, राकेश प्रसाद दूबे, आशिक बनारसी, जमाल बनारसी, वाहिद इकबाल लोहतवी, प्रदीप कुमार, डॉ. विनोद कुमार स्वामी, गणेश सिंह प्रहरी, सुबोध सिन्हा उर्फ बच्चा बिहारी, जितेंद्र श्रीवास्तव ‘टोपी’, डॉ. छोटे लाल ‘मनमीत’, नाथ सोनांचली, राम जतन पाल, आनंद मासूम तथा उमेश सिंह सहित अनेक साहित्यकार शामिल रहे।
सभी रचनाकारों ने गीत, ग़ज़ल, हास्य-व्यंग्य एवं अन्य काव्य विधाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा वातावरण साहित्यरस से सराबोर हो उठा। श्रोताओं ने रचनाओं की मुक्त कंठ से सराहना की।
अंत में संस्था के अध्यक्ष भुलक्कड़ बनारसी ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त करते हुए संस्था से जुड़े उन वरिष्ठ साहित्यकारों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया, जो आज हमारे बीच नहीं हैं, किंतु जिनके योगदान ने संस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। इसके उपरांत अल्पाहार के साथ गोष्ठी को विश्राम दिया गया।




