
आओ मिलकर प्रण ये लें,
धरती का श्रृंगार करें।
पेड़ लगाएँ, जल बचाएँ,
हरियाली से प्यार करें॥
नीला अम्बर, स्वच्छ हवाएँ,
नदियाँ गाएँ मधुर तराने।
पक्षी चहकें डाली-डाली,
खुशियों के हों नए ठिकाने॥
काटो मत वन के उपवन को,
जीवन का आधार यही।
प्रकृति माँ की कोमल गोदी,
सुख-समृद्धि का द्वार यही॥
विश्व पर्यावरण दिवस पर,
संदेश यही संसार करे।
हरा-भरा हो अपना भारत,
मिलकर सब उद्धार करें॥
स्वरचित / मौलिक
राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर–राजिम, छत्तीसगढ़




