साहित्य

अतीत से अब तक… फीफा विश्वकप

त्रिपाठी राम 

राजनीति की बिसात पर कब कौनसा मोहरा कैसी चाल चल दे , कहा नहीं जा सकता । दिग्गज खेल देशों के बीच दूसरे विश्व कप की मेजबानी का श्रेय मिला इटली सम्राट बेनिटो मुसोलनी की चाहत को। जो साम-दाम, दंड-भेद, किसी भी तरह फीफा के लोकप्रिय हो रहे इस आयोजन को अपने देश में कराकर अपनी ताकत व सर्वश्रेष्ठता साबित करना चाहता था । गत विजेता उरुग्वे यहां नहीं आया ,क्योंकि इटली भी गत आयोजन में उसके यहां नही गया था । इसके बावजूद 31 देशों ने भागीदारी की इच्छा जताई, फलतः योग्यता दौर के मुकाबलों के बाद 16 टीमों को फाइनल दौर में प्रवेश मिला ।

इटली के रोम, फ्लोरेंस,नेपल्स और ट्यूरिन जैसे शहरों में मेंचों का आयोजन किया गया ।

यहां इटली का पहले मैच में ही सामना गत विश्व कप सेमीज खेली अमेरिका की टीम से था। जहां इटली ने उम्दा खेल का मुजाहिरा करते हुए 7-1 से जीत दर्ज कर अमेरिका को कहीं का न छोडा़।मेंच सीधे नाकआउट दौर के थे , एक पराजय और स्पर्धा से बाहर । स्पेन ने ब्राजील को 3-1 से, स्वीडन ने अर्जेंटीना को, स्विट्जरलैंड ने हाँल़ेड को और आँस्ट्रीया ने फ्रांस को 3-2 के समान अंतर से शिकस्त दी।हंगरी ने इजिप्ट को4-2 से,जर्मनी ने बेल्जियम को 5-2 से और चैकोस्लोवाकिया नें रुमानिया को 2-1 से परास्त कर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।

क्वार्टर फाइनल में जर्मनी ने स्वीडन को और आँस्ट्रीया ने हंगरी को 2-1 के समान अंतर से पराजय का आइना दिखाया ।चेकोस्लोवाकिया ने एक संघर्षपूर्ण मुकाबले में स्विट्जरलैंड को 3-2 से शिकस्त दी तो इटली ने विवादास्पद मेंच में स्पेन को 1-0 से हरा दिया ।

अब बारी थी सबसे अहम मुकाबले याने सेमीज की,जहां चेकोस्लोवाकिया ने जीत का क्रम बरकरार रखते हुए जर्मनी को 3-1 से और इटली ने संघर्ष पूर्ण मेंच में आँस्ट्रीया को 1-0 से शिकस्त देकर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया ।

चेक टीम में जहां केम्बेल, स्वोवोदा,पक और गोली प्लेनिका का अनुभव था तो दूसरी और घरु दर्शकों की होसला- अफजाई व मैदान में फेरारी, मियाज्दा,ओरसी ज्वाइतर की उपस्थिति के बीच इटली जीत के प्रति कटिबद्ध दिखाई दे रहा था ।

डेलपार्टेटी स्टेडियम में चेक खिलाड़ी पक ने 20 वें मिनट में कार्नर किक पर चमकीला गोल कर इटली के खेमें में भी निराशा व्याप्त कर दी ,मुसोलिनी जिसने खिताबी जीत का जश्न मनाने के लिए अवकाश घोषित कर रखा था, कुछ समय के लिए तो उसे अपना मान खोता-सा लगा , दर्शकों के अथाह शोर के बीच अंततः खेल के 82 वें मिनट में ओरसी ने गोली प्लेनिकाकी उंगलियों को स्पर्श कराते हुए बराबरी का गोल दागा। खेल अतिरिक्त समय में पहुंचा और यहां सातवें मिनट में मियाज्जा का पास शियावियो को मिला और पलक झपकते ही शियावियों ने विपक्षी टीम के तख्ते बजा कर इटली को 2-1से स्वर्णिम जीत दिला दी । जर्मनी ने आँस्ट्रीया को 3-2से हराकर तीसरा स्थान प्राप्त किया।

इस विश्व कप के 17 मेंचों में कुल 68 गोल हुए, याने प्रति मेंच औसत चार गोल,जो दर्शकों में रोमांच पैदा करने के लिए काफी होते हैं। सर्वाधिक गोल करने का श्रेय मिला संयुक्त रूप से तीन खिलाडिय़ों,नेजेडली(चेक)शियावियों(इटली)व एडमंड कोहेन(जर्मनी)सभी ने चार-चार गोल किए। शेष..अगले अंक में…।

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.✍कार्तिकेय त्रिपाठी राम

इन्दौर 7869799232

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