साहित्य

कवि और कविता 

कविता ए. झा

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कवि और कविता

 

 

तुकबंदी करता कवि, एक व्यक्ति नहीं है,

बल्कि सामाजिक चेतना की अभिव्यक्ति है!

कवि समाज का मनोरंजनकर्ता नहीं,

अपितु उसकी आत्मा का संरक्षण कर्ता है!

 

कविता दीपक और दर्पण है,

कवि के हृदय का बहाव तर्पण है

जिनके आँखों में दर्शन है

और फूलों में समर्पण है

 

लहरों को जो कर दे गीतों में अर्पण

कवि इसी यथार्थ का करता है चित्रण;

जब कवि की भावना भाषा से बढ़ जाती,

तब पिरोए जाते हैं, कविता के शब्दों में मोती!

 

कबीर, तुलसी, सूर, निराला,

दिनकर, महादेवी या मधुशाला!

आज भी जीवंत इनका हाला!

क्योंकि कवि होते हैं मतवाला!

 

केवल शब्द नहीं कवि के पास

स्पंदित युगों की चेतना भी है साथ

कवि विचारों को जीवित रखता,

और विचार जीवित रखती सभ्यता!

 

कविता टूटे मन को देती आस,

और भटके को कराती दिशा प्राप्त

कविता आत्मकथा है,मानवता की

जिसका उद्देश्य प्रकाश है प्रसिद्धि नहीं।

 

नहीं कवि शब्दों का व्यापारी,

कवि संवेदनाओं का अधिकारी!

सत्य, करुणा और सौंदर्य में कवि की निष्ठा

कविता जीवित रहती, इसलिए कवी नहीं मरता।

 

कविता ए. झा

नवी मुम्बई

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