
जिंदगी एक भँवर जैसे होती है
नित सुख दुखों से मुकाबला है
समुद्र में लहरें आते और जाते हैं
किंतु इसे पार कर आगे बढ़ते ।
जीवन में पहले एक सीढ़ी जाना
इसकेलिए पीड़ाओं को हटाना
और आत्मविश्वास को बढ़ाना
दूसरी सीढ़ी जाने के तैयार होना।
अच्छे विचार से कार्यरत करना
और धैर्य के साथ आगे जाना
सफल केलिए मन दृढ़ होना
तीसरी सीढ़ी जाने के यत्न करना।
अपने कर्तव्य को निभाना
कर्तव्य निष्ठा नहीं छोड़ना
इसे अंतिम सीढ़ी को जाना
तब जीवन में विजय प्राप्त होंगे।
श्रीनिवास यन, आंध्रप्रदेश




