
दो दिलों की दास्तान
एक मैं एक तू!!
ढूंढ रहे हैं इन्सान
एक मैं एक तू!!
तुम्हारा फ़र्ज़ फ़र्ज़ है
बीते दिनों की दास्तान,
एक मैं एक तू!!
बिगड़े किसी की ज़िन्दगी
किस पर आए इल्ज़ाम,
एक मैं एक तू!!
सिफ़ारिश से चल रही है
ज़िन्दगी,समस्या में समाधान,
एक मैं एक तू!!
तुम्हारे लिए ज़िन्दगी बंधन नहीं
हमारे लिए है इतने इंतिज़ाम,
एक मैं एक तू!!
रिश्तो की डोर थामी किसने है
कर रहे हैं जीने का इंतिज़ाम,
एक मैं एक तू..!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




