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नई अनुकंपा नियुक्ति नीति की विसंगतियां दूर किए बिना आश्रितों को नहीं मिलेगा लाभ: राकेश पाठक
जबलपुर, 17 जून 2026: बिजली कंपनियों में संविदा पर कार्यरत अनुकंपा कर्मचारियों को नियमित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के ऊर्जा विभाग द्वारा जारी नई नीति का मध्य प्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने स्वागत किया है। हालांकि, फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने इस नीति में कई गंभीर विसंगतियां होने की बात कही है, जिससे कर्मचारियों में असुरक्षा और असमानता की भावना है।
महामंत्री पाठक ने माननीय ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अतिरिक्त मुख्य सचिव और सभी एमडी को पत्र भेजकर इस नीति में सुधार की मांग की है। उन्होंने मुख्य विसंगतियों और मांगों को रेखांकित करते हुए कहा:
• वरिष्ठता की अनदेखी: कर्मचारियों की 8 से 10 वर्षों की संविदा सेवा को वरिष्ठता में नहीं जोड़ा जा रहा है, जिससे सीनियर कर्मचारी भी जूनियर हो जाएंगे। मूल नियुक्ति दिनांक से ही वरिष्ठता का लाभ मिले।
• वेतन में गिरावट: वर्तमान में मिल रहे 27,000 – 28,000 रुपये मानदेय की तुलना में नियमित होने पर वेतन कम होने की आशंका है। इसमें स्पष्ट वेतन संरक्षण (पे प्रोटेक्शन) लागू किया जाए।
• सीपीसीटी में छूट: जिन कर्मचारियों की नियुक्ति सीपीसीटी अनिवार्य होने से पहले हुई थी, उन्हें इसमें पूर्ण छूट दी जाए या उनके कार्यानुभव को ही इसके समकक्ष माना जाए।
• शपथ पत्र की औपचारिकता बंद हो: चूंकि यह नई भर्ती नहीं है, इसलिए शपथ पत्र जैसी औपचारिकताएं हटाकर सीधे नियमित किया जाए और हायर सेकेंडरी पास आश्रितों को भी कार्यालय सहायक श्रेणी-3 के पद पर नियुक्त किया जाए।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने मांग की है कि जब तक नीति में आवश्यक संशोधन नहीं हो जाते, तब तक सभी संबंधित अनुकंपा आश्रितों को बिना शर्त नियमित कर नए पद पर ज्वाइन कराया जाए।
यह जानकारी फेडरेशन के प्रदेश प्रवक्ता मदन वर्मा द्वारा जारी की गई है।
– मदन वर्मा, प्रदेश प्रवक्ता
मप्र विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन
(जबलपुर) शाखा: इं



