
।हमारे वचन कर्म ही हमारा भाग्य लिखते हैं।
।। विधा।।गीत ।।
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हमारे वचन कर्म ही हमारा भाग्य लिखते हैं।
जैसी होती हमारी सोच वैसे ही हम सब दिखते हैं।।
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ईश्वर केवल लकीरें बनाता रंग खुद भरना होता है।
सुख-सफलता के लिए वैसा ही काम करना होता है।।
भाग्य – सौभाग्य कभी भी धन से नहीं बिकते हैं।।
हमारे वचन कर्म ही हमारा भाग्य लिखते हैं।।
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जो दुखों से आत्मबल का उपहार ग्रहण करते हैं।
ऐसे लोग अपने भीतर नव आत्मविश्वास भरते हैं।।
जैसे होते हमारे विचार वैसे हम बनते सिखते हैं।
हमारे वचन कर्म ही हमारा भाग्य लिखते हैं।।
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बदन हमारा मिट्टी का, सांसें प्रभु के उधार सी हैं।
घमंड मत करो कि,यह जिंदगी किराएदार सी है।।
जो संघर्षों में खोते नहीं उत्साह वो दौड़ में टिकते हैं।
हमारे वचन कर्म ही हमारा भाग्य लिखते हैं।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।
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