
योग, रहो निरोग,
यही जीवन का है सुखद संयोग,
तन में शक्ति, मन में प्रकाश,
योग से मिलता नव उल्लास,
प्रातः उठकर योग करें,
और सपनों को साकार करें,
हर आसन देता है बल,
दूर करे यह सभी विकल,
श्वासों का जब ध्यान लगाएँ,
मन की उलझन दूर भगाएँ,
योग नहीं केवल व्यायाम,
यह जीवन जीने का है धाम,
संयम, साधना और विश्वास,
इसी में छिपा सफलता का प्रकाश,
हर दिन तुम अपनाओ योग,
निरोगी जीवन का सुख पाओ,
यही स्वास्थ्य का सच्चा योग,
करो योग, रहो निरोग,
यही जीवन का है सुखद संयोग ||
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब
स्वरचित मौलिक रचना
20-06-2026




