
लोकतंत्र की लाज का जिसने, प्रण उठाया था,
भारत के हर दुश्मन को जिसने, सबक सिखाया था।
परमाणु परीक्षण में जिसने, भारत का परचम लहराया था,
जिसने पद्मविभूषण की उपाधि को भी पाया था।
सौ साल पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया था,
कारगिल युद्ध में अपने निर्णय से देश बचाया था।
जिसकी एक युक्ति हो भारत की भूख, निरक्षरता,
अभाव से मुक्ति हो, वो लाल अटल जब नहीं रहा।
माँ भारती भी रोई थी, सब आँखें नम थीं,
राष्ट्र की हर एक माँ शोक में खोई थी,
जिसने हर शख्स के दिल में देश प्रेम का बीज बोया था,
वो लाल अटल अब मौत की चादर ओढ़ के सोया था।
अपना बस इतना सपना है, उसका सपना अपना है,
जो अब तक नहीं हुआ, वो सब हम करके दिखलाएंगे,
भारत को हम सब मिलकर सशक्त बनाएंगे।
*एल.के विकास मिश्रा एडवोकेट……✍️*




